होर्मुज के संकट में उलझा कच्चा तेल, भारी गिरावट के बाद फिर बढ़ी कीमतें

होर्मुज के संकट में उलझा कच्चा तेल, भारी गिरावट के बाद फिर बढ़ी कीमतें

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मचा दी है। फारस की खाड़ी के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘होर्मुज गेट’ को खोलने और फिर बंद करने की घोषणाओं ने कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

आपूर्ति में बाधा और कीमतों का खेल
ईरान ने शुक्रवार को व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता खोलने का वादा किया था, जिससे कीमतें 12 प्रतिशत तक गिर गई थीं। हालांकि, अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रहने की खबर के बाद ईरान ने अपना फैसला पलट दिया। इसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड 96.25 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी कच्चा तेल 87.88 डॉलर तक पहुंच गया है।

गहराता ऊर्जा संकट
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध अब आठवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही युद्धविराम नहीं हुआ, तो तेल की कीमतें 250 डॉलर प्रति बैरल के ऐतिहासिक स्तर को छू सकती हैं। इस संकट का सबसे बुरा असर एशिया और यूरोप के उन देशों पर पड़ रहा है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर हैं।

एक झलक में

होर्मुज जलमार्ग पर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 6% से अधिक का उछाल आया।

ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 96.25 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई है।

युद्ध की स्थिति न सुधरने पर तेल की कीमतें 250 डॉलर तक जाने की आशंका जताई जा रही है।

आपूर्ति रुकने से भारत सहित एशियाई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का खतरा है।