ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता, क्या भारी पड़ेगा तेहरान का पलड़ा!

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता, क्या भारी पड़ेगा तेहरान का पलड़ा!

पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के दूसरे दौर की बैठक होने जा रही है। हालिया प्रस्तावों के विश्लेषण से संकेत मिलते हैं कि इस बार अमेरिका के मुकाबले ईरान मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि वे 2015 के ओबामा प्रशासन के समझौते से बेहतर डील करेंगे, लेकिन जमीनी हकीकत ईरान के पक्ष में झुकती दिख रही है।

परमाणु हथियार और यूरेनियम पर नई शर्तें
नए प्रस्ताव के तहत 20 साल तक ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा और यूरेनियम संवर्धन पर रोक रहेगी। बदले में अमेरिका ईरान पर कोई हमला नहीं करेगा। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ अमेरिका 20 साल की समय सीमा चाहता है, वहीं ईरान इसे 10 साल तक सीमित करने की कोशिश में है। इसके अलावा, ईरान को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए यूरेनियम के इस्तेमाल की अनुमति मिल सकती है।

आर्थिक राहत और रणनीतिक सावधानी
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान के फंसे हुए 200 अरब डॉलर को अनफ्रीज करना है। ईरान की मांग है कि समझौते के तुरंत बाद राहत कार्यों के लिए 27 अरब डॉलर जारी किए जाएं। ईरानी नेतृत्व लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी के हश्र से सबक लेते हुए किसी भी जल्दबाजी के बजाय लंबी अवधि की सुरक्षा और अपने हितों को प्राथमिकता दे रहा है।

एक झलक में

20 साल के युद्धविराम और यूरेनियम संवर्धन रोकने का प्रस्ताव।

ईरान की 200 अरब डॉलर की राशि को अनफ्रीज करने की शर्त।

ऊर्जा जरूरतों के लिए यूरेनियम इस्तेमाल करने की मिल सकती है छूट।

ट्रंप की त्वरित जीत की चाहत बनाम ईरान का लॉन्ग टर्म सुरक्षा प्लान।