चीन को मात देने के लिए भारत और UAE बिछाएंगे पाइपलाइन, श्रीलंका में ऊर्जा युद्ध तेज!

चीन को मात देने के लिए भारत और UAE बिछाएंगे पाइपलाइन, श्रीलंका में ऊर्जा युद्ध तेज!

श्रीलंका के ऊर्जा बाजार पर नियंत्रण पाने के लिए भारत और चीन के बीच कूटनीतिक मुकाबला अब एक नए स्तर पर पहुंच गया है। जहां चीन पेट्रोल पंपों और रिफाइनरियों के जरिए श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में सेंध लगा रहा है, वहीं भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ मिलकर सीधे तेल पाइपलाइन बिछाने का मास्टरस्ट्रोक चला है। हाल ही में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन की श्रीलंका यात्रा के दौरान इस महत्वपूर्ण परियोजना पर गहन चर्चा हुई है।

चीनी कंपनी ‘सिनोपेक’ हंबनटोटा में रिफाइनरी और रिटेल मार्केट पर कब्जा करने की तैयारी में है, जिससे वह श्रीलंका की रोजमर्रा की जिंदगी पर प्रभाव डाल सके। इसके जवाब में भारत ने समुद्र के रास्ते जहाजों पर निर्भरता खत्म कर सीधे पाइपलाइन के जरिए सस्ता और निरंतर तेल पहुंचाने की योजना बनाई है। यह पाइपलाइन भारत की रिफाइनरियों को श्रीलंका के त्रिंकोमाली से जोड़ेगी, जिससे परिवहन लागत में भारी कमी आएगी।

इस मेगा प्रोजेक्ट में UAE का निवेश और तकनीक भारत की स्थिति को और मजबूत बना रही है। त्रिंकोमाली के ऐतिहासिक ऑयल टैंक फार्म को एक ग्लोबल ‘एनर्जी हब’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर चीन को चुनौती देगा। वहीं, अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए श्रीलंका बहुत ही संतुलित तरीके से दोनों देशों के निवेश का स्वागत कर रहा है।

एक झलक में

  • भारत और UAE मिलकर श्रीलंका के त्रिंकोमाली तक एक सीधी मल्टी-प्रोडक्ट तेल पाइपलाइन बिछाएंगे।
  • यह परियोजना चीन की कंपनी सिनोपेक के रिटेल मार्केट विस्तार को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार की गई है।
  • पाइपलाइन के जरिए श्रीलंका को सुरक्षित, सस्ता और 24 घंटे निर्बाध ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
  • त्रिंकोमाली ऑयल टैंक फार्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर के एनर्जी हब में बदला जाएगा।