मुनीर की मध्यस्थता हुई फेल! तेहरान में 48 घंटे की मशक्कत के बाद भी क्यों अड़ा है ईरान?

ईरान और अमेरिका के बीच जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की कोशिशें नाकाम साबित हुई हैं। पिछले हफ्ते तेहरान के 48 घंटे के दौरे पर मुनीर ने ईरानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री से मुलाकात कर सुलह का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, तमाम मान-मनौव्वल के बावजूद ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बैठक के लिए साफ इनकार कर दिया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और जहाज का विवाद इस कूटनीतिक विफलता का सबसे बड़ा कारण हॉर्मुज में जारी तनाव और हाल ही में अमेरिका द्वारा एक ईरानी जहाज को कब्जे में लेना है। ईरान का दावा है कि हॉर्मुज पर केवल उसका अधिकार है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के आश्वासनों के बावजूद ओमान की खाड़ी से अमेरिकी सैनिकों की वापसी न होने और जहाज जब्त किए जाने को ईरान ने ‘युद्ध की कार्रवाई’ करार दिया है।
भरोसे का संकट और सुरक्षा गारंटी ईरान को संदेह है कि अमेरिका बातचीत का नाटक कर किसी बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। तेहरान अब किसी भी समझौते के लिए ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटर की मांग कर रहा है। पाकिस्तान की कोशिश वार्ता के जरिए युद्धविराम को आगे बढ़ाने की थी, लेकिन जमीनी हकीकत और अमेरिका के कड़े रुख ने बातचीत के रास्तों को फिलहाल बंद कर दिया है।
एक झलक में
- पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर का 48 घंटे का तेहरान दौरा ईरान को मनाने में विफल रहा।
- अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज को जब्त करने के बाद ईरान ने बातचीत की संभावनाओं को खारिज किया।
- ईरान ने हॉर्मुज पर पूर्ण नियंत्रण की शर्त रखी है और अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
- तेहरान अब किसी भी कूटनीतिक चर्चा के लिए ठोस गारंटी और सुरक्षा का आश्वासन चाहता है।
