श्रीलंका में चीन को झटका: भारत और UAE ने मिलकर शुरू किया पाइपलाइन प्रोजेक्ट!

खाड़ी युद्ध के बाद पैदा हुए गंभीर ऊर्जा संकट के बीच, भारत ने श्रीलंका के समर्थन में एक मज़बूत कदम उठाया है। मार्च 2026 में इस द्वीपीय देश को 38,000 मीट्रिक टन आपातकालीन ईंधन पहुँचाने के बाद, अब एक सीधी पाइपलाइन बनाने की योजना को मंज़ूरी दे दी गई है। भारत के उप उच्चायुक्त सी. पी. राधाकृष्णन और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस ‘मल्टी-प्रोडक्ट पाइपलाइन प्रोजेक्ट’ को लेकर उच्च-स्तरीय बातचीत पूरी कर ली है।
रणनीतिक साझेदारी और UAE की भूमिका
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस पाइपलाइन प्रोजेक्ट में एक अहम साझेदार के तौर पर शामिल हुआ है—यह पाइपलाइन भारत से शुरू होकर श्रीलंका के त्रिंकोमाली तक जाएगी। इस विशाल प्रोजेक्ट में, UAE मुख्य रूप से पूंजी और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है, साथ ही समुद्री जहाज़ों के ज़रिए तेल परिवहन में आने वाले जोखिमों और लागत को कम करना है। उम्मीद है कि यह त्रिपक्षीय गठबंधन न केवल अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में UAE के प्रभाव को बढ़ाएगा, बल्कि भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा को भी और मज़बूत करेगा।
चीन के वर्चस्व के लिए एक बड़ी चुनौती
भारत की यह “मास्टरस्ट्रोक” चाल, श्रीलंका के ऊर्जा बाज़ार पर—विशेष रूप से खुदरा विक्रेता और आयातक के तौर पर—कब्ज़ा जमाने की चीन की सोची-समझी रणनीति के लिए एक बड़ी चुनौती है। जहाँ एक ओर चीन की कंपनी ‘सिनोपेक’ रिफाइनरी और पेट्रोल पंप लगाकर बाज़ार पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रही है, वहीं भारत का यह पाइपलाइन प्रोजेक्ट श्रीलंका के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का वादा करता है। नतीजतन, अब बीजिंग के लिए इस द्वीपीय देश के ऊर्जा क्षेत्र पर एकतरफ़ा वर्चस्व जमाना आसान नहीं रहेगा।
एक नज़र में
- भारत और श्रीलंका के बीच ईंधन आपूर्ति के लिए एक सीधी ‘मल्टी-प्रोडक्ट पाइपलाइन’ बनाने की योजना।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE) इस प्रोजेक्ट में तीसरे साझेदार के तौर पर शामिल हुआ है, जो तकनीक और वित्तपोषण में योगदान देगा।
- श्रीलंका के त्रिंकोमाली तक जाने वाली यह पाइपलाइन, तेल की 24 घंटे निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
- भारत की इस रणनीतिक चाल का उद्देश्य चीन की कंपनी ‘सिनोपेक’ द्वारा बाज़ार पर कब्ज़ा करने की कोशिशों को नाकाम करना है।
