अब विदेशी कंपनियों पर नहीं, भारत की अपनी तकनीक पर चलेंगे देश के सभी मोबाइल! अश्विनी वैष्णव का बड़ा ऐलान!

अब किसी भी विदेशी कंपनी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है, बल्कि देश के लोगों के हाथ में पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से निर्मित मोबाइल फोन उपलब्ध कराने का ऐतिहासिक लक्ष्य केंद्र सरकार ने तय कर लिया है। आगामी दो वर्षों के भीतर यह सपना पूरी तरह से सच साबित होगा। यह मजबूत वादा केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया है। बीते शुक्रवार को एनडीटीवी के एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होते हुए केंद्रीय मंत्री ने देश के टेलीकॉम और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भविष्य को लेकर अपनी एक बड़ी और दूरदर्शी योजना देशवासियों के साथ साझा की।
कार्यक्रम के दौरान पूरे आत्मविश्वास के साथ अश्विनी वैष्णव ने कहा, “आज 23 अक्टूबर, 2026 है। कृपया इस तारीख को नोट कर लीजिए, आगामी 23 अक्टूबर, 2028 तक देश के हर नागरिक के पास एक ऐसा मोबाइल फोन होगा जो पूरी तरह से भारतीय डिजाइन में बना होगा, भारत में ही उत्पादित होगा और एक विशुद्ध भारतीय ब्रांड का होगा।” टेक्नोलॉजी की दुनिया में भारत की यह आत्मनिर्भरता देश के आर्थिक मानचित्र पर एक नया मील का पत्थर साबित होगी, ऐसा राजनीतिक और तकनीकी विश्लेषकों का मानना है।
हाथ में एक मोबाइल फोन थामते हुए केंद्रीय मंत्री ने बहुत ही सरल भाषा में समझाया कि बाहर से जितना आसान दिखाई देता है, असल में एक स्मार्टफोन को तैयार करना उतना ही जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। एक छोटे से इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के भीतर कई प्रकार के संवेदनशील कंपोनेंट्स और अत्याधुनिक तकनीक एक साथ काम करती हैं। इसलिए विश्वस्तरीय मोबाइल का डिजाइन तैयार करना एक कठिन प्रक्रिया है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है, ऐसा केंद्रीय मंत्री ने दावा किया।
केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि आज से लगभग तीन साल पहले देश के युवा और प्रतिभाशाली डिजाइनर्स के सामने केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा चैलेंज रखा था। उस समय उन्होंने सवाल किया था कि, “भारत के इंजीनियर अपने खुद के मदरबोर्ड या पीसीबी (PCB) का डिजाइन क्यों नहीं तैयार कर सकते?” सरकार के उस आह्वान को स्वीकार करते हुए दो स्वदेशी कंपनियों ने शानदार मदरबोर्ड डिजाइन तैयार कर दिखाए। इनमें से एक भारतीय कंपनी के डिजाइन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी सराहना मिली। वर्तमान में उस अत्याधुनिक डिजाइन को अमेरिका की एक बड़ी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के लिए चुना गया है, ऐसा उन्होंने गर्व के साथ बताया।
अश्विनी वैष्णव का दावा है कि भारतीय कंपनी द्वारा तैयार किए गए इसी एक्सक्लूसिव डिजाइन का इस्तेमाल करते हुए बेहद उन्नत तकनीक वाले 5G मोबाइल फोन का निर्माण किया गया है। इतना ही नहीं, उन फोन्स को अमेरिका की प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर कंपनी को सफलतापूर्वक सप्लाई भी कर दिया गया है और वे वहां के आम उपभोक्ताओं के हाथों तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका में मोबाइल फोन खरीदते समय आमतौर पर टेलीकॉम कंपनियों के साथ 12 महीने का कमर्शियल एग्रीमेंट किया जाता है, और भारतीय तकनीक से बने इस फोन का एग्रीमेंट भी सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
उनके अनुसार, पिछले साढ़े तीन वर्षों के भीतर भारत ने तकनीकी दक्षता के मामले में जो अद्भुत मुकाम हासिल किया है, वह देश के अपने खुद के मोबाइल ब्रांड को स्थापित करने में एक मजबूत नींव का काम करेगा। अब इसी हासिल की गई महारत का पूरा फायदा उठाकर भारतीय ब्रांड, स्वदेशी डिजाइन और बौद्धिक संपदा अधिकारों यानी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) के स्वामित्व को अपने देश की सीमाओं के भीतर ही सुरक्षित रखने का लक्ष्य सरकार ने तय किया है। इस दूरदर्शी पहल के जरिए तैयार किए जाने वाले मोबाइल फोन आने वाले समय में वैश्विक बाजार में भारी संख्या में धूम मचाएंगे, ऐसी गहरी उम्मीद केंद्रीय मंत्री ने जताई है।
मोबाइल फोन के डिजाइन की इस जटिल प्रक्रिया को समझाते हुए अश्विनी वैष्णव ने बताया कि एक छोटे से फिजिकल फॉर्मेट के अंदर रेडियो फ्रिक्वेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम, मल्टी-एंटीना, शक्तिशाली कंप्यूटिंग यूनिट, हाई-कैपेसिटी मेमोरी, आधुनिक कैमरा मॉड्यूल, ब्राइट डिस्प्ले, विभिन्न सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और कुशल पावर मैनेजमेंट सिस्टम को बेहद करीने से आपस में जोड़ना पड़ता है। इन तमाम जटिल पुर्जों को बहुत कम जगह के भीतर बिल्कुल सटीक तरीके से फिट करना होता है। इसके साथ ही मोबाइल के कुल वजन, बिजली या बैटरी की खपत और प्रत्येक कंपोनेंट के परफॉर्मेंस पर भी पैनी नजर रखनी होती है। नतीजतन, इतने छोटे आकार के पोर्टेबल डिवाइस में सब कुछ सही ढंग से जोड़कर एक प्रभावी और टिकाऊ मोबाइल तैयार करना बेहद पेचीदा तकनीकी काम है।
इस दौरान देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के अतीत और पुरानी आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर भी जोरदार निशाना साधा। उनका सीधा आरोप है कि पिछली कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल के दौरान बनाए गए जटिल नियमों, कड़े कानूनों और लाइसेंस राज व्यवस्था के कारण देश का विनिर्माण क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “वर्ष 1990 से देश में उदारीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई थी और साल 2004 तक यह प्रक्रिया काफी अच्छी गति से आगे बढ़ी थी। लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि 2004 से 2014 के बीच के दशक में एक बार फिर से नियंत्रणकारी मानसिकता हावी हो गई, जिसके कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की प्रगति में भारी रुकावटें आईं।”
विपक्ष की उन पुरानी और सुस्त नीतियों के उलट वर्तमान सरकार की सफलताओं का खाका खींचते हुए मंत्री ने दावा किया कि साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के गठन के बाद ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के साथ देश के विनिर्माण क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए निर्णायक कदम उठाए गए हैं। अंत में उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा आर्थिक स्थिति और देश के राजनीतिक व औद्योगिक इतिहास के सही परिप्रेक्ष्य को समझने पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि आज देश किस मुकाम पर खड़ा है और आने वाले समय में दुनिया भर में भारत किस प्रकार अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाएगा।
