दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग बंद होने की कगार पर, ईरान-अमेरिका संघर्ष से भारत की बढ़ी मुश्किलें

विश्व अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक-दूसरे के जहाजों को रोकने के आरोपों के बीच कई तेल टैंकर वहां फंसे हुए हैं। इस विवाद के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ ही घंटों के भीतर 6.4 प्रतिशत का उछाल आया है, जिससे मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ गया है।
ईंधन अस्थिरता और वैश्विक प्रभाव
दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने की चेतावनी के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 96.25 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। अमेरिकी नौसेना की बढ़ती सक्रियता के बावजूद बाजार शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव सैन्य संघर्ष में बदलता है, तो कीमतें 100 डॉलर के पार जा सकती हैं।
भारत के लिए बढ़ती चिंताएं
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग के जरिए मध्य पूर्व से आयात करता है। यदि मौजूदा गतिरोध लंबा खिंचता है, तो भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। तेल के साथ-साथ एलएनजी आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने देश के औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र को जोखिम में डाल दिया है।
एक झलक में
अमेरिका-ईरान विवाद के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर संकट।
कच्चे तेल की कीमतों में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि से बढ़ी महंगाई की आशंका।
वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा खतरे में, कीमतें 100 डॉलर छूने के आसार।
आयात बाधित होने से भारतीय बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छूने का डर।
