अब अमेरिका की ज़रूरत नहीं, ट्रंप को यूएई का करारा जवाब, मध्य पूर्व में बदल रहे हैं समीकरण!

अब अमेरिका की ज़रूरत नहीं, ट्रंप को यूएई का करारा जवाब, मध्य पूर्व में बदल रहे हैं समीकरण!

मध्य पूर्व की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रमुख रणनीतिकार अब्दुल खालिक अब्दुल्ला ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके देश को अब अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी सेना की आवश्यकता नहीं है। यह बयान तब आया है जब यूएई ने ईरान के हालिया हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर अपनी रक्षा क्षमता का लोहा मनवाया है, जो ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

सैन्य ठिकाने अब संपत्ति नहीं, बल्कि बोझ
यूएई के विशेषज्ञों का मानना है कि देश में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब फायदे की जगह सुरक्षा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। ईरान द्वारा यूएई स्थित ‘अल मिन्हाद’ बेस को निशाना बनाने के दावों के बाद, अबु धाबी को डर है कि अमेरिकी मौजूदगी के कारण वह बिना वजह ईरान के निशाने पर आ रहा है। यूएई अब केवल आधुनिक हथियार चाहता है, न कि वहां अमेरिकी सैनिकों की स्थायी तैनाती।

पेट्रो-डॉलर संकट और आर्थिक बदलाव
रणनीतिक बदलाव के साथ-साथ यूएई आर्थिक मोर्चे पर भी अमेरिका को चुनौती दे रहा है। ट्रंप की ईरान विरोधी नीतियों से आर्थिक नुकसान की आशंका के बीच यूएई ने तेल व्यापार के लिए डॉलर के बजाय चीनी मुद्रा ‘युआन’ का उपयोग करने की चेतावनी दी है। यदि यूएई डॉलर का साथ छोड़ता है, तो दशकों पुराने पेट्रो-डॉलर युग का अंत हो सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में अमेरिकी दबदबा कम हो जाएगा।

एक झलक में

यूएई ने अमेरिका से अपने सैन्य ठिकाने हटाने और निर्भरता खत्म करने का संकेत दिया है।

रणनीतिकारों का मानना है कि अमेरिकी मौजूदगी के कारण यूएई ईरान के हमलों का शिकार हो रहा है।

तेल व्यापार में डॉलर की जगह चीनी ‘युआन’ के उपयोग की चेतावनी से ट्रंप प्रशासन की चिंता बढ़ी है।

यह कदम मध्य पूर्व में दशकों पुराने अमेरिका-खाड़ी देशों के संबंधों में बड़ी दरार को दर्शाता है।