खालिदा ज़िया उपचार विवाद में बीएनपी की दुविधा

चीन की मेडिकल टीम के ढाका पहुंचने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के उपचार को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। ब्रिटेन और अमेरिका के विशेषज्ञ पहले से ही उनके इलाज में शामिल हैं, लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सहायता की पेशकश किए जाने से बीएनपी नेतृत्व असहज महसूस कर रहा है। पार्टी अब यह तय नहीं कर पा रही कि भारत को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए या नहीं।
बीएनपी के लिए मुद्दा सिर्फ चिकित्सकीय नहीं, राजनीतिक भी है। चुनाव नजदीक हैं और पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि भारतीय डॉक्टरों को बुलाने पर जनता इसे बीएनपी के रुख में बदलाव के रूप में देख सकती है। अतीत में खालिदा ज़िया के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव रहा था, जिसके कारण बीएनपी अक्सर भारत विरोधी छवि से जुड़ी रही है।
इस बीच, लंदन ले जाकर इलाज कराने का विकल्प चिकित्सकीय जोखिमों के कारण फिलहाल स्थगित है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकटवर्ती शहरों—कोलकाता, दिल्ली या मुंबई—में उपचार सुरक्षित हो सकता है, लेकिन भारत की भूमिका स्वीकार करना बीएनपी के लिए रणनीतिक चुनौती बना हुआ है। ऐसे में, खालिदा ज़िया का इलाज और पार्टी की चुनावी रणनीति एक-दूसरे से जुड़कर बीएनपी को कठिन मोड़ पर ले आए हैं।
