बिहार चुनाव में एनडीए की बढ़त पर एसआईआर की गूंज

बिहार चुनाव में एनडीए की व्यापक जीत के बाद एसआईआर प्रक्रिया को लेकर फिर से सवाल उठ रहे हैं। चुनावी विश्लेषण में सामने आया है कि 243 सीटों में से 174 में एनडीए की जीत का अंतर उन मतदाताओं की संख्या से भी कम था, जिनके नाम एसआईआर के दौरान हटाए गए थे। इससे विपक्ष का यह आरोप और मजबूत हुआ है कि संशोधित सूची ने चुनावी प्रभाव को किसी न किसी स्तर पर प्रभावित किया।

आँकड़ों के मुताबिक, जिन 91 सीटों पर राजनीतिक समीकरण बदले, उनमें से 75 पर एनडीए विजयी रहा। कई प्रमुख क्षेत्रों में जीत का अंतर बेहद मामूली था। मुआफ्फरपुर के कुड़हनी में भाजपा महज़ 616 मतों से आगे रही, जबकि यहाँ 24,000 से अधिक नाम सूची से हटे थे। भोजपुर के संदेश क्षेत्र में जेडीयू केवल 27 मतों से जीता, वहीं यहाँ 25,682 मतदाता सूची से बाहर हो गए थे। स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि “इतने बड़े पैमाने पर नाम हटना स्वाभाविक नहीं था और जाँच की ज़रूरत है।”

हालाँकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि वोट प्रतिशत के हिसाब से आरजेडी सबसे आगे रही। आरजेडी को 23 प्रतिशत, भाजपा को 20 प्रतिशत और जेडीयू को 19.25 प्रतिशत मत मिले। चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट किया था कि एसआईआर का उद्देश्य केवल मृत और डुप्लिकेट नाम हटाना था, लेकिन विपक्ष मानता है कि इससे प्रांत के कमज़ोर तबकों पर सबसे अधिक असर पड़ा।