आयुर्वेद दिवस 2025: रोटी बनाने और खाने के नियम
हर साल 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है, ताकि प्राचीन भारतीय चिकित्सा विज्ञान की महत्ता को याद रखा जा सके। इस अवसर पर विशेषज्ञ रोटी जैसी साधारण लेकिन आवश्यक चीज़ को लेकर भी आयुर्वेद के नियमों पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। रोटी भारतीय थाली का अहम हिस्सा है, लेकिन इसे बनाने और खाने का तरीका स्वास्थ्य पर सीधा असर डालता है।
आयुर्वेद विशेषज्ञ किरण गुप्ता बताती हैं कि रोटी हमेशा मोटे और स्थानीय अनाज जैसे जौ, बाजरा, रागी या गेहूं से बनानी चाहिए। आटा ताजा होना चाहिए और तीन घंटे पहले गूंथा जाना चाहिए। रोटी को लोहे या मिट्टी के तवे पर पकाना उत्तम माना गया है, जबकि गैस पर बनी रोटी से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही गैस से उतरी गर्म रोटी तुरंत खाने के बजाय दो से चार घंटे बाद खाना ज्यादा लाभकारी माना गया है।
पाचन तंत्र की दिक्कतों से जूझ रहे लोगों के लिए ये नियम और भी जरूरी हो जाते हैं। धीरे-धीरे चबा कर खाई गई रोटी सुपाच्य बनती है और शरीर को जरूरी ऊर्जा देती है। आयुर्वेद इस बात पर जोर देता है कि खाना बनाते और खाते समय मन शांत होना चाहिए। इस तरह साधारण रोटी भी आयुर्वेदिक सिद्धांतों से जुड़कर स्वास्थ्य को संतुलित रखने का साधन बन जाती है।
