ट्रंप के नए वीज़ा नियमों से भारतीयों की मुश्किलें बढ़ीं

भारत-अमेरिका व्यापार तनाव के बीच अब वीज़ा नियमों में बदलाव भारतीयों के लिए नई चुनौती बन गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने H-1B वीज़ा और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को सख्त करने का मसौदा मंज़ूर कर लिया है। अभी तक लॉटरी सिस्टम से तय होने वाला H-1B अब वेतन आधारित होगा। यानी, अधिक सैलरी पाने वालों को वीज़ा में प्राथमिकता दी जाएगी। चूंकि इस वीज़ा का 70% हिस्सा भारतीयों को मिलता है, इसलिए इसका असर सबसे ज़्यादा भारत पर होगा।

अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने मौजूदा प्रणाली को “धोखाधड़ी” बताते हुए कहा कि कम वेतन वाली नौकरियों के लिए विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता खत्म करनी होगी। इस बदलाव से नए स्नातक और छोटे व्यवसायों में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी कठिनाई में आ सकते हैं। वहीं, वीज़ा आवेदन में बायोमेट्रिक और निजी जानकारी की अनिवार्यता प्रक्रिया को और पेचीदा बना सकती है।

इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन “गोल्ड कार्ड” योजना शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जो केवल मेधावी और उच्च आय वर्ग के कर्मचारियों को प्राथमिकता देगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन कार्ड स्थायी निवास की गारंटी नहीं होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन कदमों का सीधा असर भारतीय आईटी उद्योग और अमेरिका में पढ़ाई करने आए छात्रों पर पड़ेगा, जिससे उनके भविष्य की राह और कठिन हो सकती है।