रूस से दूर हुआ आर्मेनिया, यूरोप की राह पर बढ़ा

नई दिल्ली: रूस के दशकों पुराने सहयोगी आर्मेनिया ने अब अपना रास्ता बदल लिया है। जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कीव पर ध्यान केंद्रित किए हुए थे, उसी समय आर्मेनिया रूस की कक्षा से बाहर निकलता दिखा। यूरोपीय संघ से जुड़ने की प्रक्रिया को संसद की मंजूरी और अबू धाबी में अजरबैजान के साथ बिना रूस की मध्यस्थता के शांति वार्ता ने इस दिशा को और स्पष्ट कर दिया है।

सितंबर 2023 में अजरबैजान द्वारा नागोर्नो-कराबाख पर कब्जे के बाद रूस की निष्क्रियता ने आर्मेनिया को झकझोर कर रख दिया। दशकों से जिस रूस को ‘बिग ब्रदर’ माना जाता था, उसने इस बार कोई हस्तक्षेप नहीं किया। प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान ने स्पष्ट किया कि संकट के समय रूस से कोई मदद नहीं मिली, जिससे अब यूरोप की ओर बढ़ना देश की राजनीतिक प्राथमिकता बन गया है।

रूस की ओर से आर्मेनिया को डराने के कई प्रयास किए गए—अफवाहें, सैन्य तैनाती की झूठी खबरें और हालिया तख्तापलट की साजिश। लेकिन आर्मेनिया अब न सिर्फ यूरोप बल्कि तुर्की जैसे पुराने विरोधियों से भी संवाद शुरू कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रूस के लिए सिर्फ कूटनीतिक झटका नहीं, बल्कि भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी भी है।